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नई दिल्ली 
: जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले विदेशी नेताओं के आधिकारिक निमंत्रण में पारंपरिक 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' के स्थान पर 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' के इस्तेमाल से राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई है. विपक्षी नेताओं ने इस कदम की आलोचना की है और इसे उनके 28 पार्टियों के गठबंधन से जोड़ा है, जिसका नाम 'इंडिया' है. वहीं भाजपा ने सवाल किया है कि कुछ पार्टियां "देश के सम्मान और गौरव से जुड़े हर मुद्दे पर आपत्ति क्यों करती हैं". 

निमंत्रण में इस्तेमाल शब्दों पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की ओर से आई है, जिन्होंने पूछा कि अगर विपक्षी गठबंधन खुद को 'भारत' कहने का फैसला करता है तो क्या सत्तारूढ़ दल देश का नाम बदलकर 'भाजपा' कर देगा. 

केजरीवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, "मुझे कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि यह (नाम परिवर्तन) हो रहा है. सिर्फ इसलिए कि कई विपक्षी दलों ने एक गठबंधन बनाया है और इसे INDIA कहा है, क्या केंद्र देश का नाम बदल देगा? देश 140 करोड़ लोगों का है, किसी एक पार्टी का नहीं है. अगर गठबंधन का नाम बदलकर भारत कर दिया जाए तो क्या वे भारत का नाम बदलकर बीजेपी कर देंगे?"

केजरीवाल ने कहा कि भाजपा विपक्षी गठबंधन से इतनी परेशान है कि जब पहली बार इसकी घोषणा की गई तो उसने अपने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव से लोगों का ध्यान इससे हटाने की कोशिश की.

केजरीवाल की पार्टी के सहयोगी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भी भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि देश किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है. 

चड्ढा ने एक्स पर लिखा, "आधिकारिक जी-20 शिखर सम्मेलन के निमंत्रणों पर 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' को 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' में बदलने के भाजपा के हालिया कदम ने भौंहें चढ़ा दी हैं और एक सार्वजनिक बहस को जन्म दे दिया है. भाजपा 'INDIA' को कैसे खत्म कर सकती है? देश एक राजनीतिक दल से संबंधित हैं. यह 135 करोड़ भारतीयों से संबंधित है. हमारी राष्ट्रीय पहचान भाजपा की निजी संपत्ति नहीं है कि वह सनक और मर्जी से इसे बदल सकती है. जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया.''