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 NEW DELHI: दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में झटका लगा है. दिल्ली की अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में शुक्रवार (28 अप्रैल) को उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया. राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज एमके नागपाल ने मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज की है.

अब निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सिसोदिया अब दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेंगे. कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमानत अर्जी का विरोध किया था. ईडी ने कहा था कि जांच ‘महत्वपूर्ण’ चरण में है और आप के वरिष्ठ नेता ने यह दिखाने के लिए मनगढ़ंत ई-मेल तैयार किये थे कि नीति को सार्वजनिक स्वीकृति हासिल थी.

मनीष सिसोदिया ने क्या दावा किया था?

सिसोदिया की याचिका में दावा किया गया था कि जांच के लिए उनकी हिरासत की अब आवश्यकता नहीं है. आप नेता लगातार दावा करते रहे हैं कि ये पूरा मामला झूठा है और केंदर सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है.

गुरुवार (27 अप्रैल) को कोर्ट ने सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 12 मई तक बढ़ा दी थी. इससे पहले दिल्ली की अदालत ने सीबीआई की तरफ से दर्ज किए गए आबकारी नीति मामले में 31 मार्च को सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी.

कोर्ट ने कहा था कि सिसोदिया प्रथम दृष्टया इस मामले में आपराधिक साजिश के सूत्रधार थे और उन्होंने दिल्ली सरकार में अपने और अपने सहयोगियों के लिए लगभग 90-100 करोड़ रुपये की अग्रिम रिश्वत के कथित भुगतान से संबंधित आपराधिक साजिश में 'सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख भूमिका' निभाई.