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NEW DELHI: दीपक बॉक्सर ने भागने का प्‍लान तो फूलप्रूफ बनाया था। पी. रवि अंतिल के नाम से नई पहचान, असली पासपोर्ट... इसके बावजूद यह शातिर अपराधी पकड़ा गया। वह 'डॉन्की रूट' के रास्‍ते अमेरिका पहुंचने की फिराक में था। एक ह्यूमन ट्रैफिकर के साथ 50 लाख रुपये की डील हो चुकी थी। दीपक बॉक्सर ने जिस ट्रैफिकिंग नेटवर्क की मदद ली, उसमें पुलिस के भी मुखबिर हैं, उन्होंने अलर्ट कर दिया। जब लोकेशन कन्फर्म हुई तो लोकल अथॉरिटीज को जानकारी दी गई। मेक्सिको में जब वह पकड़ा गया तो उसकी कवर स्टोरी मजबूत थी। पासपोर्ट जेनुइन था लेकिन दीपक बॉक्सर एक चीज भूल गया कि दिल्‍ली पुलिस के पास उसके फिंगरप्रिंट्स हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय से ग्रीन लाइट मिल ही चुकी थी। फौरन सबूतों के साथ एक टीम मेक्सिको भेजी गई और 'पी. रवि अंतिल' का भांडा फूट गया। 

पिछले साल दो निर्दोष लोगों का खून बहाकर दीपक बॉक्सर ने दहशत फैलाई। दोनों को कोई और समझकर मार दिया गया था। फिर दीपक बॉक्सर ने 1 करोड़ रुपये रंगदारी देने से मना करने पर बिल्डर अमित गुप्ता की हत्या करवा दी। पुलिस और प्रशासन उसकी मनबढ़ई से हैरान थे। वह जितेंदर गोगी का गैंग चला रहा था। गोगी को 2021 के एक शूटआउट में मौत के घाट उतार दिया गया था। मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला दीपक बॉक्सर अपने विरोधियों की हत्या करके जरायम की सीढ़ियां चढ़ रहा था।

दीपक बॉक्सर ने 2016 में गोगी को दिनदहाड़े जेल से छुड़ाकर दहशत फैला दी थी। 2021 में में कुलदीप फज्‍जा को भी कस्टडी से छुड़ाया। लेकिन पिछले साल की हत्‍याओं ने दीपक बॉक्सर के सिर पर लटक रही तलवार और करीब ला दी। वह दिल्‍ली पुलिस की मोस्‍ट वॉन्‍टेड लिस्ट में टॉप पर पहुंच गया। स्‍पेशल सेल हो या क्राइम ब्रांच, दिल्‍ली पुलिस की हर यूनिट दीपक बॉक्सर की तलाश में जुट गई।

खतरा महसूस कर दीपक बॉक्सर ने विदेश भागने में ही भलाई समझी। अमेरिका जाने की फिराक में दीपक बॉक्सर ने ह्यूमन ट्रैफिकर्स से मदद मांगी। 'डॉन्की रूट' के रास्‍ते 'डॉन्की' बनकर रवाना हुआ। 'डॉन्की रूट' वह तरीका है जिसके जरिए किसी देश में अवैध रूप से एंट्री की जाती है। इसके लिए कई देशों में रुकते हुए आगे जाना होता है। अमेरिका पहुंचने के लिए इस रूट पर पनामा के जंगलों में कठिन ट्रेक से होकर गुजरना पड़ता है। दीपक बॉक्सर भी कई जगह रुकते हुए गया। वह दुबई, अलमाती, तुर्की, पेरामारिबो, पनामा सिटी, अल सल्‍वाडोर और कोस्‍टा रिका में रुका था। 

आखिर में वह मैक्सिको के कैनकन पहुंचा। मैक्सिको के रास्‍ते अमेरिका में दाखिल होना चाहता था। वहां पर अपने और साथियों से मिलता और विदेशी जमीन से दिल्‍ली और आसपास के इलाकों में दहशत फैलाए रहता।दिल्‍ली के स्पेशल सीपी एचजीएस धालीवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दीपक बॉक्सर ने जिस ट्रैफिकिंग नेटवर्क से मदद मांगी, उसमें कुछ मुखबिर थे। 

उन्होंने दीपक बॉक्सर के भागने की सूचना दी। जब उसकी लोकेशन कन्फर्म हुई तो मेक्सिकन और FBI अधिकारियों को सारी जानकारी दी गई। अमेरिका और भारत में 12 घंटे का टाइम डिफरेंस है, इसके बावजूद सारा टेक्निकल प्रोसेस पूरा किया गया। आखिरकार दीपक बॉक्सर को कैनकन शहर से अरेस्ट कर लिया गया। कैनकन ह्यूमन ट्रैफिकर्स और ड्रग माफिया के गढ़ के रूप में कुख्‍यात है।