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NEW DELHI:
दिवाली यानी 12 नवंबर की रात दिल्ली-एनसीआर में जमकर आतिशबाजियां हुई. इन पटाखों ने दिल्ली के प्रदूषण का लेवल एक बार फिर बढ़ा दिया है. सोमवार की सुबह चारों तरफ धुआं ही धुआं नजर आ रहा है. दिवाली की शाम तक दिल्ली का प्रदूषण स्तर एक्यूआई 218 था, जो कि अगले दिन यानी 13 नवंबर को बढ़कर 999 हो गया है. 

राजधानी दिल्ली में फिलहाल विजिबिलिटी भी बेहद कम हो गई है. इंडिया गेट के आसपास के इलाकों में तो हालात ऐसे हैं कि 100 मीटर दूर तक भी साफतौर पर देखना मुश्किल हो गया है. 

हालांकि ये पहली बार नहीं है जब नवंबर की शुरुआत से दिल्ली वासियों को धुएं में ज़िन्दगी बितानी पड़ रही हो. ऐसा कई सालों से होता आ रहा है. ठंड की शुरुआत के साथ ही दिल्ली वासियों के हिस्से प्रदूषण आना भी आम हो गया है. 

हर साल प्रदूषण के साथ ही सरकार और विपक्षी पार्टियों का एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो जाता है, लेकिन इन सब में एक फैक्टर ऐसा है जिस पर हर साल खूब बहस होती है. इस वजह से किसानों पर जुर्माना तक लगाया जाता है और वो है पराली को जलाना.


ऐसे में एक सवाल ये भी उठता है कि पराली तो पहले भी जलाई जाती थी क्योंकि दिल्ली के आस-पास वाले क्षेत्रों में सदियों से जमकर खेती होती रही है. तो अभी कुछ सालों में ही क्यों ये एक बड़ी समस्या बन कर सामने आई है. 

पंजाब में कम हो रहा पानी एक बड़ी वजह

इस सवाल के जवाब को समझने के लिए सबसे पहले साल 2009 में पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए पंजाब उपमृदा जल संरक्षण अधिनियम (Punjab Preservation of subsoil water act) को समझना होगा. दरअसल पंजाब और हरियाणा दोनों ही राज्यों में लगातार ग्राउंड वाटर यानी जमीन के भीतर के पानी का लेवल कम हो रहा है. जिसके लिए सरकार ये कानून लेकर आई, पहले ये कानून पंजाब में आया फिर हरियाणा में. इस कानून के अनुसार किसानों को 10 मई से पहले चावल की बुवाई करने से मना किया गया. 

इसके पीछे की वजह ये थी कि धान की खेती में काफी पानी की ज़रूरत होती है और बुवाई के दिन आगे बढ़ाने से किसानों को सिंचाई के लिए ग्राउंड वाटर नहीं बारिश के पानी से मदद मिल पाए. लेकिन इससे हुआ ये कि पहले जो पराली सितंबर के आखिर या अक्टूबर के पहले हफ्ते तक काट कर जला दी जाती थी उसमें देरी होने लगी. 

15-20 दिन पराली देर से जलाने से इतना प्रदूषण क्यों? 

अलग-अलग शोधकर्ताओं की मानें तो सितंबर में हवा में नमी की कमी होती है और उस उस वक्त दिल्ली में हवा का रुख पश्चिम की तरफ होता है.अक्टूबर तक आते आते हवा का रुख उत्तर पश्चिम की तरह हो जाता है. मतलब दिल्ली में हवा नॉर्थ से आती है. यही कारण है कि पराली के धुएं की हवा आगे नहीं जा पाती है और राजधानी दिल्ली में उस धुएं की चादर बन जाती है. आसान भाषा में समझे तो ये पूरा खेल हवा के रुख का है और पराली को जिस वक्त जलाया जा रहा है उस टाइमिंग में गड़बड़ी है और यही गड़बड़ी भी दिल्ली के वायु प्रदूषण को बढ़ाने का एक फैक्टर है. 

दिल्ली के प्रदूषित हवा के पीछे पंजाब हरियाणा का योगदान 

अब हर साल पराली जलाने के कारण दिल्लीवासियों को हो रही परेशानी को देखते हुए 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने भी पंजाब सरकार को फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार जल्द से जल्द पराली जलाने पर रोक लगाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप को रोकें और इस मसले का जल्द से जल्द कोई हल निकाला जाए. 

वैसे तो दिल्ली की हवा को प्रदूषित करने में  हरियाणा और पंजाब का अच्छा-खासा योगदान रहता है. लेकिन हाल ही में एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि साल 2022 की तुलना में इस साल पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 40% की गिरावट आई है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की मानें तो इन राज्यों के अलावा उत्तर प्रदेश,राजस्थान और मध्य प्रदेश में ज़रूर इन घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. 

दिल्ली की हवा कितनी ख़राब

     इलाका           एक्यूआई
मथुरा रोड                  414
IGI एयरपोर्ट T3         417
आनंद विहार                333
बवाना                  331
आरके पुरम                319 
नोएडा सेक्टर 1         503
आईटीओ                303
लोधी रोड         
        422
नरेला         
       304
नोएडा सेक्टर 125       313
   
दिवाली से पहले कैसी थी राजधानी दिल्ली की हालत 

पिछले हफ्ते से ही राजधानी दिल्ली में प्रदूषण ने लोगों की हालत खराब कर दी है. कई इलाकों में तो एक्यूआई 500 के भी पार चला गया था. पिछले एक हफ्ते से दिल्ली एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने ग्रैप-4 लागू कर दिया था. इसके अलावा किसी अन्य राज्य से आने वाले ट्रकों और डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया. 

इस प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार ने दिवाली के बाद से ऑड-ईवन लगाने का भी फैसला किया था. हालांकि दिवाली के दो दिन पहले बारिश होने के कारण हवा में मौजूद प्रदूषण के कण हट गया था और मौसम साफ हो गया. बारिश के बाद जिन इलाकों में प्रदूषण का स्तर 500 के पार चला गया था वहां 100 के आसपास पहुंच. हालांकि दिल्ली की अगली सुबह एक बार फिर वातावरण में प्रदूषण की मोटी परत नजर आ रही है. 

दिवाली ने हवा को कितना प्रभावित किया?

दिवाली से पहले कई राज्यों में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दी गई थी. राजधानी दिल्ली भी उनमें से एक है. दिल्ली में तो कई टीमों को भी तैनात किया गया था, जो इस पर निगरानी रख सके. हालांकि तमाम बंदिशों और पाबंदियों के बावजूद कल राज लगातार हुए आतिशबाजी ने ये साफ कर दिया है कि राज्यों में किसी भी प्रतिबंध का ठीक से पालन नहीं हुआ है. इसी का नतीजा है कि आज सुबह से ही आसमान में फिर से धुंध छा गई है.