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DELHI: हज कमेटी पहुंचा BJP vs AAP का झगड़ा!

THN Network 

देश की राजधानी दिल्ली में हज कमेटी को 10 दिन के अपना अंदर ऑफिस खाली करना होगा. दिल्ली सरकार के DUSIB ने एक करोड़ से अधिक रुपये किराया बकाया होने का हवाला देते हुए इस संबंध में दिल्ली हज कमिटी की चेयरपर्सन को नोटिस भी भेज दिया है. इसके अनुसार, बकाया राशि को जमा करने के लिए सिर्फ 10 दिन का समय दिया गया है. इस पूरे मामले को लेकर रविवार को दिल्ली बीजेपी प्रदेश कार्यालय पर बीजेपी प्रवक्ता शाजिया इलमी, हज कमेटी की चेयरमैन कौशर जहां, दिल्ली प्रदेश बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष हारून युसूफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा.

'38 लाख बकाया, लेकिन नोटिस 1 करोड़ का'

हज कमिटी की चेयरपर्सन कौशर जहां ने इस दौरान कहा कि, 'दिल्ली के मुख्यमंत्री इस पवित्र और रमजान के पाक महीने में हज कमेटी को नोटिस भिजवा रहे हैं. इसका सिर्फ एक मात्र कारण यह है कि उनकी पार्टी के प्रतिनिधि का हज कमेटी के अध्यक्ष पद पर हार होना. इसी वजह से दिल्ली के मुख्यमंत्री बौखलाए हुए हैं. सिर्फ 38 लाख रुपये बकाए पर 18% ब्याज लगाकर 1 करोड़ से अधिक का बिल बनाकर भेजा गया है. एक तरफ तो वो मुस्लिमों के भले की बात करते हैं और अल्पसंख्यक मामलों को लेकर प्रचार प्रसार पर करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं. वहीं दूसरी तरफ नोटिस भेज कर कार्यालय खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया. नोटिस में दिए गए समय पर खाली नहीं करने पर जबरदस्ती खाली करावने की चेतावनी भी दी गयी.'

'उपराज्यपाल ने दिया हर संभव मदद का भरोसा'

कौशर जहां ने आगे बताया कि, 'सिर्फ 2 दिन पहले ही हमें नोटिस दिया गया है. हज कमेटी का कार्यालय वहां पिछले कई सालों से हैं. लेकिन आज तक इस प्रकार के किसी भी सरकार में नोटिस नहीं दिया गया है. इससे साफ जाहिर होता है कि केजरीवाल अपनी हार से हताश है और बदले की राजनीति की वजह से वह ऐसा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्होंने उपराज्यपाल से मदद की गुहार लगाई है, जिस पर उपराज्यपाल ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया है. नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि रमजान का पवित्र महीना चल रहा है ऐसे में हम सभी अल्लाह की खिदमत करते हैं और हज यात्रियों की सुविधाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। लेकिन अचानक केजरीवाल सरकार के इस तरह से हज कार्यालय को खाली करने के नोटिस से आज दिल्ली के मुसलमान ही नहीं पूरे देश के मुसलमान भी अचंभित हैं कि आखिर दिल्ली के मुख्यमंत्री करना क्या चाहते हैं.'


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