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NEW DELHI:
दिल्ली सर्विसेज बिल पर लोकसभा में बहस के दौरान बीजेपी सांसद ने महाभारत के दुर्योधन के चरित्र पर भाषण देते हुए कहा कि दिल्ली भारत की राजधानी है, लिहाजा देश को शर्मिंदगी से बचाने के लिए इस प्रकार के बिल लाने जरूरी हैं। सदन में उन्होंने दुर्योधन की तुलना दिल्ली राज्य के अहंकारी, कायर, भ्रष्ट विश्वासघाती 'बौने दुर्योधन' से की।

रमेश बिधूड़ी का पूरा भाषण

'दिल्ली भारत का दर्पण है। यहां दुनियाभर के देशों के दूतावास हैं। दुनिया के लोग दिल्ली आते हैं और दिल्ली से अंदाजा लगाते हैं कि भारत कैसा है। जहां भारत को शर्मिंदगी से बचाना है, तो वहां इस प्रकार के बिल लाने जरूरी होते हैं।

हम सबने बचपन में महाभारत देखी है, उस सीरियल में एक श्लोक आता है- यदा यदा ही धर्मस्य...। महाभारत में कहा गया है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है तबतब सज्जन लोगों की रक्षा के लिए, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए आता हूं।

'दिल्ली का बौना दुर्योधन छलिया है'
ये बिल दिल्ली में पिछले 8 वर्ष से हो रहे अधर्मी सरकार के अधर्म को समाप्त करने के लिए लाया गया है। महाभारत में एक चरित्र था जिसका नाम था दुर्योधन। आज दुखद है कि दिल्ली राज्य में भी उसी नकारात्मक मानसिकता का एक चरित्र, एक व्यक्ति दुर्योधन के रूप में बैठा हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि वो दुर्योधन लंबा-चौड़ा था लेकिन ये दुर्योधन थोड़ा बौना है। दूसरा उसके पास एक शकुनी था और इस बौने दुर्योधन के पास भ्रष्टाचारी, परिवारवादी, सनातन विरोधी ऐसे गठबंधन के लोग साथ लग गए हैं। इसलिए राज्य के प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में तालमेल जरूरी है। परंतु जब छलिया, अहंकारी, भ्रष्ट, कायर जनप्रतिनिधि सत्ता में बैठ जाते हैं तब जनसेवा की व्यवस्था को संरक्षित करना जरूरी हो जाता है। ये बौना दुर्योधन छलिया है।

'बौने दुर्योधन का विश्वासघात'
इस बौने दुर्योधन का पहला चरित्र था विश्वासघात। जिन लोगों को जनमानस का विश्वास था अन्ना जैसे लोगों को, कुमार विश्वास जैसे लोगों को...सत्ता में बैठने के बाद उनके साथ विश्वासघात किया, जिनके दम पर ये शासन में आया था। उनको धोखा दिया। दुर्योधन ने ऐसा ही विश्वासघात किया था अपने चचेरे भाइयों के साथ। दुर्योधन ने भी छलकपट से सत्ता हथियाई। इस बौने दुर्योधन ने भी झूठे वादे करके कहा इस बौने दुर्योधन ने कि मैं पूरे दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे लगवाऊंगा। पता नहीं ये कांग्रेस वाले कहां सीसीटीवी कैमरे ढूंढ रहे हैं। मैं पांच सौ स्कूल बनाऊंगा। पता नहीं कहां ये स्कूल गिन लिए कांग्रेसियों ने। 500 स्कूल के साथ 20 कॉलेज बनाऊंगा, वाईफाई दिल्ली को दूंगा। दिल्ली को लंदन-पैरिस बनाऊंगा। हर घर में नल से जल दूंगा। जनलोकपाल दूंगा। 2 लाख पब्लिक टॉइलट बनाऊंगा। 30 हजार बेड के नए अस्पताल बनवाऊंगा। यहां सांसद बैठे हैं, कोई गिनकर बता दे कि इस छलिए ने जो कहा था, कितना दिल्ली का विकास हुआ है।

'बौने दुर्योधन का अहंकार'
दूसरा चरित्र था- अहंकार। कृष्ण भगवान ने भी कहा था दुर्योधन से, बार-बार कहा था कि 5 गांव पांडवों को दे दो। उसने कहा कि एक सूई की नोंक के बराबर भी नहीं दूंगा। इसी तरह बौना दुर्योधन कहता है कि मैं दिल्ली का मालिक हूं। न खाता न बही, जो ये कहे वो सही। अनैतिक, असंवैधानिक काम करने के लिए इसने गुंडागर्दी, दादागीरी की। दिल्ली में एक हजार नई बसें लानी थी। कैबिनेट ने अप्रूवल दे दिया। ढाई हजार करोड़ का घोटाला। बस की कीमत होगी 1 करोड़ लेकिन कंपनी को मैंटिनेंस का पैसा दिया जाएगा 3 करोड़। जब ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने मना किया तो बुराड़ी में पार्टी के 200 गुंडों के साथ उस महिला अफसर के साथ दुर्व्यवहार किया गया। वो ढाई हजार को घोटाला करना चाहता था। उसने चीफ सेक्रटरी को बुलाकर कहा कि जो हम कहे वो करो। वरना विधायकों को बुलाकर उसे पिटवाया। देश का कोई एक उदाहरण बताइए कि चीफ सेक्रटरी को चैंबर में बुलवाकर पिटवाया गया। 2 अधिकारियों के परिवार पंजाब में रहते हैं, उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है।

'बौने दुर्योधन का भ्रष्टाचार'
बौने दुर्योधन ने कहा था कि भ्रष्टाचार खत्म करूंगा। रामराज्य लेकर आऊंगा। ये दलदल है। सोनिया चोर है, लालू चोर है, डीके शिवकुमार चोर है, शरद पवार चोर है, नीतीश, मुलायम सिंह चोर है...शीला को जेल भेज दूंगा। सबको चोर भ्रष्टाचारी बताया था। इसी ने बताया था न, हमने नहीं बताया था। लेकिन बाद में इनके ही झूले में झूलने लगा। इससे बड़ा छलिया क्या होगा? लिकर स्कैम में मंत्री जेल के अंदर है। हवाला स्कैम में मंत्री जेल में है। स्कूल में कमरे बनाने का, कंस्ट्रक्शन घोटाला। जल बोर्ड के अंदर 8 साल तक ऑडिट नहीं हुआ। बोर्ड लाखों, करोड़ों के घाटे में चल रहा है। बिजली कंपनियों को 26 हजार करोड़ नहीं दे रहा। ये घोटाला है। ये कंपनियां भाग गईं तो दिल्ली अंधेरे में डूब जाएगी। पीडब्लूडी का घोटाला सामने है। पीडब्लूडी में इसने अपने साढ़ू को बिना टेंडर के 10 करोड़ रुपये का ठेका दिया। उसने शर्म के मारे आत्महत्या कर ली और उसका बेटा जेल गया।

अपनी पार्टी के नेताओं के परिवार वालों को पिछले दरवाजे से 437 लोगों को, चहेतों लोगों को डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपये की मनमाने तरीके से नौकरी दी। कोई आरक्षण का नियम लागू नहीं हुआ। कोई ओबीसी नहीं, कोई एससी नहीं, कोई रिजर्वेशन नहीं। इनमें 2 हजार करोड़ की बंदरबांट की। विधायकों, नेताओं के बेटा, बेटी, बहू, मौसी, ताई, फुफी, चाची इनको बांटा जाता है ये बंदरबांट।

'दुर्योधन की तरह बौना दुर्योधन भी कायर'
दुर्योधन का एक चरित्र था कायर। दुर्योधन कायर था, लड़ाई नहीं लड़ सकता था, चालें चलता था शकुनी के माध्यम से। भारत में कोई मुख्यमंत्री है जिसके पास एक भी विभाग नहीं है। इतना कायर है कि साइन कराएगा अफसरों से, साइन कराएगा मंत्रियों से। दो मामा जेल भेज दिए। इससे बड़ा कायर क्या होगा जी, जब कोई जिम्मेदारी नहीं लेता हो। परिवार को कोई मुखिया जिम्मेदारी से भगे तो उससे ज्यादा नालायक मुखिया नहीं हो सकता। ऐसा कायर व्यक्ति अगर दिल्ली की गद्दी पर बैठेगा तो दिल्ली देश की राजधानी है। टू जी स्पेक्ट्रम के दौरान अगर भारत की अस्मिता लुटेगी तो दुनिया में भारत भी बदनाम होगा। क्योंकि इनकी एक मंत्री विदेश गई थी एक प्राइवेट प्रोफेसर ने बुलाया था लेकिन यहां मेसेज दिया कि हमें कैम्ब्रिज ने बुलाया है जी। ये मंत्री वहां जाकर बोली कि दिल्ली में 5 करोड़ लोग भूखे सोते हैं। जाने क्या अफीम खाते हैं। ये भी कोई रफूगर है, इसके भी किसी मामा-फूफी को लगा दिया होगा किसी नौकरी पर।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तुम्हारे पास 13 हजार करोड़ रुपये विज्ञापन के लिए है लेकिन रैपिड रेल के 450 करोड़ नहीं हैं। बौने दुर्योधन ने आयुष्मान योजना को दिल्ली में रोक दिया। गरीब का बेटा, मां, बहन, बहू बिना इलाज के जीवन को ना खो दे, वो दिल्ली के लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं दिया। बौने दुर्योधन को बीजेपी से दुश्मनी हो सकती है लेकिन दिल्ली वालों से क्या दुश्मनी है। इसी बौने दुर्योधन ने 26 जनवरी को देश के रिपब्लिक डे पर जब बाहर से डेलिगेट आए थे, तब ये बौना दुर्योधन राजपथ पर धरने पर बैठ गया था।'